ये कहानी हैं एक बुजुर्ग महिला की,  जिनके साथ ऐसी कई घटनाएँ घटी जो अच्छी भी थी और बूरी भी थी. यह कहानी हमें एक ऐसी सीख देगी,  जिसे पढ़कर हम अपने माता पिता के प्रती आदर का भाव रखने लगेगें. दोस्तो माता पिता जैसे भी हो उनका आदर करना बहूत जरूरी हैं. कहते है जो माँ बाप का आदर नहीं करते भगवान भी उनसे ना खूश होते हैं. ये कहानी शुरू करने से पहले में आपसे फिर कहना चाहूँगी कि माँ बाप कि बुढापे में खूब सेवा करे उनको दुख न दे. आपका प्यार माँ बाप के लिए किसी स्वार्थ कि वजह से न हो. आपका प्यार माँ बाप के लिए सच्चा हो और नि:स्वार्थ हो यही आपके भविष्य के लिए भी अच्छा होगा. तो चलिए कहानी आगे बढ़ाते हैं.




यह कहानी है कमला नाम की एक महिला की उनका जन्म एक अच्छे संस्कारी परिवार में हुआ था. वह बच्पन से ही चनचल और हँसमुख थी. उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं कि हुँई थी,  वह मात्र 8 वी पास थी. वह भाई बहनों में सबसे बडी थी. भाई बहन बहुत छोटे-छोटे थे. उनको घर के सब काम करने पड़ते,  उन्होंने घर में गाय भैस भी पाल रखी थी. 

वह खूद भाई बहनो को संभालती और पशुओं की सेवा भी करती. उनके माता पिता  सुबह-सुबह ही खेतों पर काम करने नीकल जाते और शाम को ही लौटकर आतेे थे. ऐसे में घर की और भाई बहनो कि जिम्मेंदारी कमला पर आ गई थी. इसी वजह से वह ज्यादा पढ़ नहीं पाई हालाकि उनको पड़ने का बहूत शौक था.धिरे-धिरे वह बडी हुँई उनकी शादी के लिए रिश्ते आने लगे. 

उनकी माता जी की वह लाड़ली थी. जब भी रिश्ते आते वह बोल देती कि अभी तो वो छोटी हैं. यह बोल-बोल कर उन्होंने उनकी  शादी को 2 साल तक टाले रखा. फिर एक दिन कमला के मामा जी एक लड़के का रिश्ता ले आए. कमला कि माता जी को वह रिश्ता बहुत पसंद आया, आता भी क्यों न उनके भाई लेकर आए थे. 

इसके बाद कमला कि शादी नीरज नाम के लड़के से हूँई वह एक प्राईवेट कम्पनी में काम करता था, और इतना कमा लेता था कि वह अपने बीवी बच्चे पाल सके.नीरज भी बहुत अच्छे स्वभाव का था. दोनो की जिंदगी बहुत अच्छी कट रही थी. कुछ दिन ऐसे ही हँसते खेलते बीता उनको 3 बेटे भी हुए.जिनका नाम उन्होने राज, राजेश, राजकुमार रखा. वह तीनो बचपन में बहुत संस्कारी थे. माँ का कहना मानते उनके कामो में हाथ बटाते.जब वह बड़े हुए तो उन्होने जूतो कि कम्पनी खोली जिसमें उनको बहुत लाभ हूआ. सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था अब कमला  ने सोचा कि इनकी शादी करवा देते है. जब शादी कि बात छीडी़ तो पता चला की लड़कियां वह तीनो पहले ही खोजकर बैठे थे.  कमला ने उन्हीं लड़कियों से उनकी शादी करवा दी और दहेज़ में एक रूपयाँ भी नहीं लिया. 

शादी के 6 महिने में हि बहुओ ने अपने रंग दिखाना शुरू कर दिया.  वह कुछ काम नहीं करती थी तीनो बहुए कमला से लड़ती गाली गलोच करती थी.  कमला बिचारी कुछ नहीं बोलती अपने कामो में लगी रहती और रोती.  उसने अपने बच्चों और पती तक को अपनी तकलीफ नहीं बताई,  लेकिन बहुए अपने पतियों के काम से आते ही तुरंत चुगली करती की तूम्हारी माँ लड़ती हैं. खाने को नहीं देती दहेज़ नहीं दिया बोलकर सुनाती हैं. 

एक दिन तीनो बेटे अपनी पत्नियों कि बातो मे आकर कहने लगते हैं कि माँ तूम हमारी पत्नियों को बहूत परेशान करती हो दहेज़ के लिए इसलीए हम अलग होना चाहते हैं .  ये सूनते ही कमला ज़मीन पर चक्करा कर गिर जाती हैं. कमला उठकर बोलती हैं ऐसे मत जाओ मैंने कभी उनको कुछ नहीं कहा लेकिन वह एक नहीं सूनते अपना-अपना सामान लेकर नीकल जाते हैं. कमला रोती रही फिर उसका पति उसे ढांढस देता की तू क्यों रोती हैं मैं तो हूँ तेरा. इसके बाद कुछ समय ऐसे हि बीता एक दिन कमला और उसका पति रोड में टहल रहें थे कि अचानक एक तेज़ रफ़तार ट्रक आकर कमला के पति को रोदती हुँई चली गई और वहा उनकी मौत हो गई. अब कमला बिल्कुल अकेली हो गई थी कोई नहीं था जो उनके आँसू पोछे. 


बेशर्मी की हद तो तब पार हूई, जब बाप कि मौत हो गई और एक भी बेटा मिलने तक ना आया. कमला बेहद दूखी थी वह अपने आने वाले भविष्य की चिंता में थी कि आगे अकेले जिंदगी कैसे काटेगी.लेकिन एक दिन कमला के पति के ऑफिस से कुछ लोग आए और कहने लगे कि आपके पति ने 50 लाख का इंश्योरेंस करवाया था जो अब आपको मिलेगा. इंश्योरेंस की बात सूनकर वह चौक गई यह बात उसके पति ने कभी नहीं बताई थी. 

उन पैसो से कमला ने अपने घरको बनवाया उसे 4 मंजिला इमारत मे तबदिल कर दिया जिसका नाम उन्होंने कमलानीरज नीवास रखा. बाकी का बचा पैसा उसने बैंक में रखवा दिया. उस 4 मंजिला घर के कुछ कमरे उन्होनें किरायदारो को दिया ताकी उनकी दवा दारू के लिए कुछ पैसे आते रहे और बाकी के कुछ कमरे उन्होंने अपनी ही तरह बेसहारा बहू बेटे के सताए माँ बापो को रहने के लिए दे दिया. इस तरह  कमला खुब सारे लोगो के साथ हँसती खेलती रहती उन्हें अब अकेलापन भी महसूस नहीं होता. कमला के घर में करिब 200 लोग रहने लगे थे. वह सब एक साथ एक परिवार कि तरह रहते थें.

एक दिन खबर आई के कमला के लड़को के जुतो कि फैक्ट्री में आग लग गई सारा माल जल कर खाक़ हो गया हैं. उनका घर भी नीलाम हो चुका हैं वह तीनो किसी बस्ती में किराय पर रह रहें हैं उनके बहुत बूरे हाल हैं.कमला यह सूनते ही बहुत चिंतीत हूँई क्या करती बिचारी माँ का दिल हैं पिघल ही गया.  अपने उपर हुए अन्याय को  भूलकर वह उन्हें देखने गई.माँ को देखकर तीनो बेटे फूट-फूट कर रोने लगे और उनके पैर पकड़ने लगे.  माँ ने उन्हें सीने से लगाया प्यार किया खूद भी रोने लगी. तीनो बेटो में से दो को बीवियां उनके फटेहाल देखकर छोड़कर चली गई थी. बीच वाले की बीवी थी तो उसने भी तूरंत पैर छू कर अपनी गल्ती की कमला से माफी मांगी. कमला ने उसे माफ किया और उन तीनो को अपने घर ले आई. 
इतना बड़ा घर और वहा इतने लोग देखकर वह चारो काफी हैरान हुए उन्होंने पूछा कि माँ ये सब कौन है? तब कमला ने जवाब दिया की यह हमारा परिवार हैं और हम सब एक साथ रहते हैं.कमला और उसके परिवार ने मिलकर जिसको जो काम आता था वह करना शूरू कर दिया कमला की किराने की 4 दुकाने थी जिसे उसके बेटे सम्भालते थे.बाकी जो बेसहारा बुजुर्ग थे उन्हें उनकी शक्ति अनुशार काम करना होता था बाकि जो कमजोर बुजुर्ग थे उनकी सेवा कमला के बच्चे करते थे.बस ऐसे हि समय बीतता गया अब सब ठिक हो गया था अगर कमला के पति इंश्योरेंस करके न जाते तो कमला की जिंदगी कैसी होती आप सोच सकते हो... 

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