जैसे कि हम सब जानते हैं कि सावन का पवित्र महिना शूरु हो चुका हैं.कहते हैं कि सावन के इस पवित्र महिने मे भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता हैं. लेकिन इस बार का सावन थोड़ा अलग होगा मंदिरो में भिड़ कम दिखेगी और लोगो के चेहरे पर मास्क होगा.  जी हा  आपने सही सूना इस कोरोना नाम की महामारी से अभी हमें छूटकारा नहीं मिला  हैं. जो हम फिर पहले जैसे आजादी से कुछ भी कर सके.लेकिन फिर भी  शिव के भक्त अपने महादेव को प्रसन्न करने में लगे रहेगे क्योंकि शिव प्रसन्न होकर मन की हर इच्छा पूरी करते हैं.आजके दिन विशेषकर कुवारी कन्याएँ मन पसंद का वर पाने कि इच्छा रखते हुए व्रत रखती हैं.हालाकि यह वर्त कोई भी रख सकता हैं. अपने इच्छा अनुसार सभी भगवान शिव का व्रत रखते हैं. सावन सोमवार का व्रत  भगवान शिव और देवी पार्वती के लिए किया जाता हैं.    मान्यता अनुसार सावन  मास में भगवान शिव और पार्वती जी का विवाह हुआ था.  भोले नाथ का विवाह भी लोकमंगलकारी है.  प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत को सावन  माह में आरंभ करना शुभ माना जाता है. तथा इसका फल भी अच्छा मिलता हैं. लेकिन क्या आप जानते है कि भगवान शिव की पूजा में क्या चढ़ता हैं और क्या नहीं ?में आज ये पोस्ट उन्हीं के लिए लिखने जा रही हूँ.  जिनको बिल्कुल भी नहीं पता कि भगवान शिव की पूजा में क्या लगता हैं और क्या नहीं लगता, और वह कैसे भगवान शिव को प्रसन्न करें. तो चलिए नीचे पोस्ट में पढ़िए महादेव के वर्त में क्या करे...... 

शिव जी का सबसे आसान मंत्र हैं नमः शिवाय


नमः शिवाय मंत्र शिव जी को अति प्रिय भी हैं और सबसे आसान भी हैं.  इसे आसानी से सभी पढ़ सकते हैं. आपने सभी के मुख से यह मंत्र जरूर सूना होगा लेकिन क्या आपको इसका मतलब पता हैं? नहीं पता तो में बतलाती हूँ. यह बहुत प्रचलित शिव मंत्र है. इस मंत्र का मतलब है, ‘मैं भगवान शिव को नमन करता हूं' या करती हूं . इस मंत्र का 108 बार जाप करने से भगवान शिव की कृपा बनती है और साथ ही धन की प्राप्ति भी होती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्ती होतीी हैैं

व्रत से आएगी खूशियां


जो भी भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा-अराधना करता है उसके जीवन से सारे संकट दूर हो जाते है और जीवन में ढैर सारी खूशियां भर जाती हैं या फिर ये कहे की उसका जीवन आनंद से भर जाता है. 

तुलसी नहीं चढ़ती 


शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव ने जालंधर नामक राक्षस का वध किया था और उनकी पत्नी तुलसी थी तो उन्होंने अपने पति का वध करने पर भगवान शिव  को श्राप दिया की भगवान शिव की पूजा मे तुलसी नहीं चढ़ाई जाएगी. यही वजह है कि भगवान शिव की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है। 

शहद, भांग, धतूरा हैं अति प्रिय


शिव जी को भांग, धतूरा बहुत प्रिय होता है.  जो भी भक्त भांग, धतुरे, शहद से महादेव की पूजा करते हैं तो उन्हें महादेव शक्ति और अच्छा स्वास्थय प्रदान करते हैं.  सावन मास में शिवपुराण और शिव चालीसा का पाठ करने से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं.  

इस शिव मंत्र का भी जाप करे


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मान्यता अनुसार कहते हैं की इस मंत्र को पढ़ने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं


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