दोस्तों रक्षाबंधन जो भाई और बहन के प्यार का त्यौहार है वह भी आ चुका है, लेकिन इस बार के  सारे त्यौहार ख़राब हो गए है  लोग किसी भी त्यौहार को खुलकर नहीं मना पा रहे.वजह आप सभी जानते ही होंगे ,इस कोरोना नामकी महामारी ने सारे तीज त्यौहार को ख़राब कर दिया है लोग इस वर्ष कोई भी त्यौहार ख़ुशी-ख़ुशी नहीं मना पा रहे हैं. टकितने लोग ऐसे है जो अपने घर परिवार से दूर है,वह कोरोना के चलते अपने परिवार से मिलने तक नहीं जा पा रहे.इस कोरोना को बढ़ते-बढ़ते 6 से 7 महीने    होने आ गए लेकिन ये बीमारी है जो जाने का नाम तक नहीं ले रही.  कम होने के जगह यह बीमारी  बढ़ती ही जा रही है. 

रक्षाबंधन का महत्व 


रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार का त्यौहार है जिसे बहुत  धूमधाम से मनाया जाता है.आपतो जानते ही है की इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ और लंबे जीवन की कामना करती हैं. भाई भी अपनी  बहन की रक्षा करने का वचन देते है साथ ही उन्हें नेक भी देते है. 

रक्षा बंधन एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जिसे  केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुसरे देशों में भी मनाया जाता है. रक्षाबंधन  श्रावण माह के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.रक्षाबंधन अभी से नहीं मनाया जा रहा है बल्कि देवी-देवता भी राखी का त्यौहार मनाया करते थे.आज में आपको राजा-महाराजाओ  से लेकर देवी-देवता तक की रक्षाबंधन की कहानी सुनाऊँगी , की कैसे और कबसे रक्षाबंधन का महत्व बढ़ा ,तो रक्षाबंधन  की  कहानियाँ नीचे इस पोस्ट में पढ़िये ........


 माँ  लक्ष्मी और राजा बलि की रक्षाबंधन की कहानी


कथाओं  के अनुसार असुरो के राजा  बलि  भगवान विष्णु का  बहुत ही बड़ा भक्त था उसने अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को  बहुत प्रसन्न करके रखा हुआ था . बलि की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जी ने असुर बलि को वरदान मांगने को कहा तो बलि ने  भगवान को उसके राज्य की रक्षा करने के लिए उनको,  उसके साथ रहने को कहा इसके बाद भगवान स्वयं ही उसके राज्य की रक्षा करने लगे. भगवान विष्णु ने बलि की रक्षा में बैकुंठ में रहना कम कर दिया था जिसके चलते माँ लक्ष्मी चिंतित रहने लगी.   
एक दिन माँ लक्ष्मी जी ने सोचा की वह ब्राह्मण महिला बनकर असुर बलि के महल में रहने चले जाएँगी.  इसके बाद  वह ब्राह्मण महिला का रूप धारण कर असुर बलि के घर रहने चली गई . कुछ समय बाद माँ लक्ष्मी ने असुर को भाई बनाने की इच्छा प्रकट की और असुर बलि भी मान गया.
माँ लक्ष्मी ने बलि से कहा की में तुम्हे अपना भाई बनाउंगी तो  तुमको मुझे कुछ देना भी होगा  .बलि तैयार हो  गया   तो  माँ लक्ष्मी ने बलि के  हाथों में राखी भी बांध दी . बलि को ये  बिलकुल नहीं पता था की वह ब्राह्मण  महिला और कोई नहीं माता लक्ष्मी है.
माँ लक्ष्मी  ने बलि से कहा की भगवान विष्णु जी के बिना बैकुंठ सुना है मैं उन्हें वापस ले जाना चाहती हु.  बलि क्या करता माँ को वचन  दे चुका था की वह जो भी मांगेगी  असुर बलि उन्हें देगा .इसलिए उन्हें भगवान विष्णु को वापस बैकुंठ लौटना पड़ा. असुर बलि ने भी अपनी बहन माँ लक्ष्मी जी के लिए भगवान विष्णु  को वापस लौटा दिया था.

श्री कृष्ण और द्रौपती की कहानी


एक निष्ठुर राजा था शिशुपाल जो अपनी जनता पर अत्याचार करता था. अपने भक्तो को उस पापी राजा से मुक्ति दिलाने के लिए  श्री कृष्ण को उस दुष्ट राजा से युद्ध करना पड़ा जिस युद्ध में शिशुपाल मर गया. लेकिन  इस युद्ध के दौरान कृष्ण जी को थोड़ी चोट आ गई उनकेे अगुठे पर लग गइ थी और उसमें से खून नीकल रहा था. जब द्रौपती ने देखा की श्री कृष्ण के अगुठे से खून बह रहा हैं, तो उन्होंने अपना आँचल फाड़ा और कृष्ण के अगुठे पर बांध दिया. इस पर श्री कृष्ण बोले की हे द्रौपती तूम मेरी बहन हो जैसे तूमने आज मेरी रक्षा की में भी तूम्हारी रक्षा करूंगा. 
श्री कृष्ण ने अपने द्वारा दिए गए वचन को निभाया भी  महाभारत में जब  द्रौपती को कौरव सभा में जुए के खेल में महाराजा युधिष्ठिर ने हारा था तब वहा कौरवों के राजकुमार दुहसासन ने द्रौपती का चिर हरण करने लगा. तब श्री कृष्ण ने द्रौपती की अस्मिता की रक्षा की  उन्हे भरी सभा में बेइज्जत होने से बचाया था बाद में पाण्वो के साथ मिलकर द्रौपती के साथ हुए अपमान का बदला भी लिया.

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ


रानी कर्णावती चितौड़ की रानी थी वह एक विधवा रानी थी गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने उनके राज्य पर हमला कर दिया. 
रानी किसी भी तरह अपने राज्य को बचाना चाहती थी लेकिन वह अकेली क्या कर सकती थी. उन्होंने एक दिन  सम्राट हुमायूँ को राखी भेजा उनकी और उनके राज्य की रक्षा करने के लिए. 
हुमायूँ  भी उनकी राखी देखकर खुश हो गए और  हुमायूँ ने भी अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी सेना भेज दी. हुमायुँ की सेना देखने के बाद  बहादुर साह की सेना डरकर खुद ही पीछे हटने लगी. 

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