दोस्तो कुछ समय पहले में हर की पौडी़ गई हूई थी . वहा का शूद्ध वातावरण मेरे मन को भा गया, गंगा जी में स्नान करके ऐसे लगा मानो मन अंदर से पावन हो गया. हर की इस पौड़ी पर नहाने की हर श्रद्धालु की प्रबल इच्छा होती है क्योंकि माना जाता है यहाँ नहाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सारे पाप भी धूल जाते हैं. लोग हजारो की संख्या मे वहा आते हैं.  एक तरह से वहा मेला जैसा लगा रहता हैं. हरिद्वार में संध्या आरती भी होती हैं जो बहूत सूंदर लगती हैं.  सच बताउ तो वहा इतना अच्छा महशूश हो रहा था मूझे  की आज भी मन करता हैं फिर जाऊ. लेकिन आप सब जानते ही हैं कि कोरोना ने सारी अर्थव्यवस्थाओं को डगमगा दिया हैं. चाह कर भी इंसान धर्म स्थलो में नहीं जा सकता क्योंकि जीवन हैं तो सब हैं इस कोरोना का संक्रमण इतना फैलता जा रहा हैं की आयदिन ख़बर आती रहती हैं कि आज इतनी मौते हूई. मौतों का आंकड़ा लाखो पार कर चुका हैं. हम तो यही कहेंगे की घर पर रहीए, सुरक्षित रहीए, बार-बार हाथ धोते रहिए. तो चलिए हर की पौड़ी के बारे में आज थोड़ा कुछ जान लेते हैं,  जो भी मेंने वहा अनुभव किया. 



कहा हैं हर की पौड़ी


हर की पौड़ी  भारत उत्तराखंड की पवित्र धार्मिक नगरी  हरिद्वार  में स्थित हैंं. हर की पौड़़ी पवित्र स्थलों में से एक मानी जाती है. गंगा मइया पहाड़ो से नीकल कर यहाँ तक आती हैं. लोग यहाँ गंगा मइया मेें डूबकी लगा कर अपने जन्म-जन्मातंर के पाप धोकर जाते हैैं. मन से
और तन से निर्मल हो जाते हैं.  

 हर की पौड़ी का मतलब 


दोस्तो पहले तो में आपको हर की पौड़ी का मतलब बताना चाहुगी. हर की पौड़ी का मतलब होता हैं.  "भगवान शिव के चरण" अर्थात, "भगवान शिव" के पैर जी हा इसका यही मतलब होता हैं. इसके पिछे हैं एक कथा...... 

हर की पौड़ी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओ के अनुसार हजारो वर्ष पहले देवता और असुरों के  बीच समुन्द्र मंथन हुआ था उस मंथन में  बहुत कुछ नीकला था जिसमे से एक अमृत भी था जब अमृत नीकला तो उसे भगवान विश्वकर्मा असुरों से बचाकर ले जा रहें थे तब अमृत की बूंदे छलक कर धरती पर गिरती गई और जहाँ-जहाँ अमृत की बूंदे धरती पर गिरी वह जगह पवित्र हो गई. उसी पवित्र स्थलो में से एक हैैं हर की पौड़ी में उस समय अमृत की कुछ बूंदे भी गिरी थी. जिससे यह स्थान पवित्र हो गया. 

कहा जाता हैं की हर की पौड़ी में राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भरथरी की याद में बनवाया था और वह गंगा किनारे ध्यान करते थे जहाँ वह ध्यान करते थे आज वह जगह ब्रह्मकुंड कहलाती है.  
हर की पौड़ी घाट 
हर की पौड़ी में घाट बना हुआ हैं. जहाँ  सभी श्रद्धालु और साधू संत यंही स्नान करते हैं. कई लोग गंगा पूजा और आरती भी करते है. शाम को हर की पौड़ी जगमगाने लगती हैं.  

सच मानीए इतना खुबसूरत नजारा होता है शाम को वहा का आरती की गूंज के साथ जगमगाता हर की पौड़ी बेहद खुबसूरत नज़र आती हैं. 

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