दोस्तो भगवान कृष्ण बचपन से  नटखट और अपने चमत्कार  लोगो को दिखाने वाले थे. उनकी बाल्यकाल की लिलाए आज  भी ब्रिज की गलीयों  मे सूनने मे आती हैं. वहा के साधू-संत कृष्ण के बालपन से लेकर युवा अवस्था तक की गाथा लोगो को सुनाते है. निधी वन के बारे मे आपने तो सूना ही होगा वहा रात में कृष्ण और उनकी गोपिया आज भी रास लीला रचाने आते हैं. आज हम बताने जा रहे है भगवान के जन्म के बारे में जी हा श्री कृष्ण के जन्म के बारे में  आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे. 




शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.इसलिए तभी से यही माना जाता है की इस तीथी में  श्री कृष्ण ने जन्म लिया था तो  कृष्ण जन्म का उत्सव भी इसी समय में ही मनाया जाने लगा. अष्टमी तिथि मे भगवान कृष्ण का  जन्म होने के कारण ही इस उत्सव का नाम जन्माष्टमी पड़ गया. 

श्रीकृष्ण के कई रूप और नाम हैं वह कभी यशोदा मैया के लाल कन्हैया होते हैं, तो कभी ब्रज के नटखट कान्हा, बाकेबिहारी, मूरली मनोहर,नंदलला,कमल नयन, तो कभी छलिया, इनके अनैक नाम है. 

जन्माष्टमी को कृष्ण के विदेशी भक्त भी बहुत ही हर्षोल्लास से मनाते हैं. मथुरा में श्रीकृष्ण के मंदिर में आप विदेशी भक्तो की भिड़ देख सकते हो,  वहा हजारो की संख्या में लोग प्रतिवर्ष श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बहुत ही धुमधाम से मनाते  हैं.  


पौराणिक कथा के अनुसार 



पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान कृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद या भादों मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था. श्रीकृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे. मथुरा के राजा कंस देवकी के भाई यानी के श्री कृष्ण के मामा थे जो बहुत अत्याचारी था. वह अपनी निर्दोष प्रजा पर बहुत अत्याचार करता था. उसी के अत्यार से निर्दोष जनता को बचाने के लिए भगवान कृष्ण को धरती पर मानव अवतार लेना पड़ा.  एक दिन जब कंस किसी पर जुल्म ढा रहा था तब आकाशवाणी हुई और एक साधु ने भी भविष्यवाणी कर दी कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा और उसके जुल्मो से लोगो  को आजादी  मिल जाएगी .   

यह सुनकर कंस ने उस साधु को सजा दी साथ ही अपनी बहन देवकी और  उनके पति वासुदेव को  काल-कोठारी में डाल दिया. कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले जन्में सारे बच्चों को मार डाला लेकिन जब देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वहा  प्रकट होकर कृष्ण के पिता वासुदेव को कहा की कंस से बचाने के लिए आप  श्रीकृष्ण को गोकुल में माँ यशोदा  और नंद बाबा के घर उन्हें छोड़ आए, ताकि वहा कृष्ण सुरक्षित पल सके.  

श्रीकृष्ण को वासुदेव, माँ यशोदा  के आँचल में छोड़ आय.  बस उनके जन्म की खुशी में तभी से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता हैै.. 

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