दोस्तों  हमारे देश में कई जातियों के कई धर्मो के लोग एक साथ मिल-जुलकर बड़े ही प्रेम भाव से रहते है. यहाँ की संस्कृति  हमे अच्छे संस्कार देती है, तभी विदेशी भी  हमारे  देश में आकर भारतीय रंग में रंगने की कोशिश करने लगते है.  आपने वृंदावन में देखा होगा वहा कई विदेशी कृष्ण जी के भजन गाते नज़र आते है. देवी-देवताओं को भारत में विशेष स्थान दिया  है. आज हम एक ऐसे देवता के बारे में  बात कर रहे हैं  जिनके चमत्कारों के चर्चे  भी सुनने में आते है. 

तो  यहां बात हो रही है एक ऐसे स्थान की  जहां आज भी भगवान परशुराम का फरसा रखा हुआ है. वह स्थान है भारत का  झारखंड राज्य का टांगीनाथ धाम  , इस  धाम में आज भी भगवान परशुराम के पद चिह्न मौजूद हैं.पुराणों के अनुसार  भगवान परशुराम ने इसी फरसे से कभी पूरी  पृथ्वी के क्षत्रियों का नाश किया था. चलिए  जानते हैं इस फरसे के बारे में और अधिक . 




टांगीनाथ धाम, है यहाँ 

झारखंड राज्य के रांची से करीब 150 km दूर घने जंगलों के बीच टांगीनाथ धाम स्थित है.  यहाँ पर भगवान परशुराम का फरसा ज़मीं मे गड़ा हुआ  है. वैसे आपको बता दें झारखंड में फरसा को टांगी कहा जाता है, इसलिए इसका  नाम टांगीनाथ धाम पड़ गया.


इस धाम को कोई महत्व  नहीं 


नक्सलवाद के कारण इस मंदिर का  कोई विकाश नहीं हो पाया है, इसी वजह से वहा की सरकार  भी इस पर ध्यान नहीं दे रहीं, इसीलिए फिलहाल इस धाम को कोई महत्व नहीं दिया जा  रहा. यही वजह की लोग इनके बारे में जानते भी नहीं अभी ये धाम खंडर बन चुका है. 





विष्णु के छठवें अवतार परशुराम


भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम ने टांगीनाथ में  तपस्या कि थी. कथा के अनुसार  कहा जाता है की   राजा जनक ने  सीता जी के लिये स्वयंवर आयोजन किया था तब भगवान  राम  ने भगवान शिव का धनुष तोड़ दिया तो  परशुराम बहुत क्रोधित होते हुए वहा  आयोजन  में पहुँचते है और राम को शिव का धनुष तोड़ने के लिए क्रोध में आकर चिल्लाने लगते  है.

लेकिन भगवान राम सब कुछ सुनकर भी मौन रहते है, यह देख कर लक्ष्मण को क्रोध आ जाता है और वो परशुराम से बहस करने लग जाते है.इसी बहस के दौरान जब परशुराम को यह ज्ञात होता है कि राम भी भगवान विष्णु के ही अवतार है तो वो बहुत लज्जित होते है और वहाँ से निकलकर पश्चाताप करने के लिये घने जंगलों के बीच आ जाते है. जहां वह भगवान शिव की स्थापना कर और बगल मे अपना फरसा गाड़ कर तपस्या करते है.  इसी जगह को आज सभी टांगीनाथ धाम से जानते हैं.

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