दोस्तों  भगवान राम का  नाम  तो बच्चा -बच्चा जानता है. भगवान राम  का नाम लेते ही  तन-मन सब पवित्र हो जाते है. भगवान राम का नाम लेते ही जन्मों-जन्मो के पाप मिट जाते हैं.  दोस्तो हमने अपने बड़े बुजुर्गो से  राम जी की रामायण की संपूर्ण कथा जानी. इतना ही नहीं आजकल तो टेलीविज़न के माध्यम से भी जो  रामायण की संपूर्ण कथा से अवगत नहीं थे, वह भी रामायण की कथा से अवगत हो चुके हैं. 

इस कोरोना नाम की बिमारी के चलते टि. वी चैलनो मे काफी समय बाद दुबारा फिरसे हम सबके पंसदिदा कार्यक्रमों को दिखाया गया था.  उन्ही में से थे महाभारत और रामायण जिसमे हमने राम-सीता और रावण को जाना. 

दोस्तो आपने राम जी के सभी परिवार को जान लिया होगा या उनके परिवार के व्यक्तियों के बारे में सूना होगा लेकिन क्या आपने कही भी उनकी बहन के बारे में सूना है? जि हाँ भगवान राम की भी एक बहन थी जिनके बारे में हम आज आपको बताएंगे... 




राम की बहन शांता


हमने कभी राम की बहन शांता का जिक्र कहीं होते ना तो देखा, ना सुना और ना ही पढ़ा है. लेकिन श्री राम की एक बड़ी बहन भी थी जिसका नाम शांता था. देवी शांता महार ाज दशरथ और रानी कौशल्या की पुत्री थी. महाराज  दशरथ की दो अन्य रानियां भी थी. 

शांता के बाद राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी, वो एक पुत्र चाहते थे जो उनके राजवंश को आगे बढ़ाए. उन्होंने ऋषि श्रृंग को पुत्रकामेष्टि यज्ञ करने के लिए बुलाया जिसके परिणामस्वरूप राम, भरत और जुड़वां लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ.




 राजा को गोद  दे दिया 


एक बार जब अंगदेश के राजा रोमपद राजा दशरथ से मिलने अयोध्या अपनी पत्नी के साथ आये तो उन्हे ज्ञात हुआ के राजारोमपद की कोई संतान नहीं है. संतान ना होने का क्या दुःख होता है यह समझते हुए राजा दशरथ ने अपनी बेटी शांता को उन्हें दे दिया. उसके बाद राजा रोमपद शांता को लेकर अंगदेश लौट आये. 




शांता  का विवाह 


शांता को वेद, कला और शिल्प का अनूठा ज्ञान था, वह बहुत सुंदर थीं. एक दिन राजा रोमपद, शांता के साथ बातचीत में व्यस्त थे तभी एक ब्राह्मण वर्षा  के दिनों में राजा से खेती में मदद मांगने आया. रोमपद ने ब्राह्मण की याचना पर ध्यान नहीं दिया. अपनी उपेक्षा से नाराज ब्राह्मण वहां से चले गए. 

वर्षा के देव इंद्रदेव भी अपने भक्त के इस अपमान से नाराज हो गए. इसलिए वर्षा  के मौसम में वहां बहुत कम वर्षा होती थी. सूखा पड़ने से वहां हाहाकार मच गया.

इस समस्या से मुक्ति पाने के लिये रोमपद ऋषि शृंग के पास गए. रोमपद ऋषि श्रृंग से यज्ञ करने की विनती करते हैं. ऋषि श्रृंग के कहेनुसार यज्ञ किया जाता है जिसके बाद अंग देश में वर्षा होती हैं और सूखे की समस्या खत्म हो जाती है. इससे प्रसन्न होकर रोमपद ने अपनी पुत्री शांता का विवाह ऋषि श्रृंग से कर दिया.


यहाँ होती है देवी शांता की पूजा 


हिमाचल के कुल्लू में शृंग ऋषि के मंदिर में भगवान राम की बड़ी बहन शांता की पूजा होती है.  यह मंदिर कुल्लू से 50 कि.मी दूर बना हुआ है.  यहां देवी शांता की प्रतिमा भी स्थापित है, इस मंदिर में देवी शांता और उनके पति शृंग ऋषि की साथ में पूजा होती है. 


मान्यता है 


दोनों की पूजा के लिए कई जगहों से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर की मान्यता है कि शांता देवी के इस मंदिर में जो भी भक्त देवी शांता और शृंग ऋषि की सच्चे मन से पूजा करता है उसे भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है. देवी शांता के मंदिर में दशहरा बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. 



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