अपराजिता बेल नुमा पौधा है, जिसके फूल बेहद सुंदर लगते हैं.इसके फूल दिखने में बिल्कुल गाय के कान की तरह दिखते हैं, इसलिए इन्हें गोकर्णी भी कहा जाता है.यह नीले या सफेद रंग के होते हैं . 





आयुर्वेद मे है इसका विशेष महत्त्व


अपराजिता का फूल कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में लाभकारी होता है और यह दिमागी क्षमता को बढ़ाने का भी कार्य करता है. 

 वैज्ञानिक नाम हैं


इसका नाम क्लाइटोरिया टर्नेशिया (Clitoria Ternatea) है, जो कि फेबेसी फैमिली से ताल्लुक रखता है.इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-स्ट्रेस, एंटी-डिप्रेसेंट, एंटी-डायबिटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एनेसथेटिक, इंसेक्टीसाइडल गुण होते हैं.

अपराजिता के फूल की चाय करती है दिमाग को तरोताजा


अपराजिता फूल से बनी चाय दिनभर की थकान मिटाने के लिए काफी है.इस फूल से बनी चाय थकान मिटाकर आपको स्वस्थ्य भी बनाए रखेगी.

इसकी चाय बनाने के लिए 


पानी गर्म करके उसमें एक चम्मच चीनी और एक फूल डालें. इसके बाद पानी का रंग बदल जाएगा.इतना ही नहीं बल्कि स्वाद में भी यह ग्रीन टी से अच्छी होगी.


खाने का रंग बदलने के लिए 


खाने का रंग बदलने या रंगबिरंगे चावल बनाने के लिए आप इस फूल का यूज बखूबी कर सकते हैं.अपराजिता के फूल को सूखाकर इसका पाउडर बना लें.



अपराजिता का उपयोग निम्नलिखित स्थिति मे किया जाता है



रेस्पिरेटरी सिस्टम को स्वस्थ बनाने के लिए


अपराजिता में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-स्ट्रेस, एंटी-डिप्रेसेंट, एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जिस वजह से जीवाणु, तनाव की समस्या, अवसाद की समस्या, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में सूजन आदि की वजह से होने वाली खांसी, जुकाम, अस्थमा जैसी समस्याओं में यह हर्बल सप्लीमेंट काफी उपयोगी होता है.
इससे बना हुआ काढ़ा गले की खराश आदि कई समस्याओं के निवारण में मदद करता है.

माइग्रेन के दर्द से राहत


जैसा कि हमने बताया कि, तनाव और अवसाद के कारण माइग्रेन की समस्या होती है.इसलिए, अपराजिता का इस्तेमाल माइग्रेन की समस्या और उसके लक्षणों से राहत पाने के लिए किया जा सकता है.इस समस्या से राहत पाने के लिए इस जड़ी-बूटी को कान पर भी बांधा जाता है और इसके बीज, जड़ आदि का अलग से भी उपयोग किया जाता है.




पाचन तंत्र के लिए लाभदायक



अपराजिता में एंटीएमेटिक्स, एंटीडिस्पेप्टिक और माइल्ड लैक्सेटिव गुण होते हैं, जिस वजह से यह पाचन तंत्र के लिए काफी लाभदायक होता है.क्योंकि, इससे पेट की आम समस्याएं, जैसे अपच, उल्टी, कब्ज, पीलिया और बवासीर जैसे रोगों में राहत मिलती है.इसके अलावा, यह पाइलोरस ड्यूडेनम के अल्सर के लिए भी आरामदायक साबित होता है.

चोट या घाव मे


किसी भी तरह के चोट या घाव होने पर  अपराजिता से बने काढ़े से आप चोट या घाव को धोकर सूजन, दर्द व इंफेक्शन के डर से राहत पा सकते हैं.

गर्भवती होने के लिए


नीली अपराजिता की जड़ को कुंवारी कन्या द्वारा बकरी के दूध में पिसवाकर मासिक के बाद तीन दिन तक पीने से बन्ध्या स्त्री भी गर्भवती हो जाती है.


ऐसे भी है इसके लाभ



भूत-प्रेत भगाने हेतु


शनिवार की रात्रि में नीली अपराजिता की जड़ को प्राप्त करके सिद्ध करके भूत-प्रेत बाधा से युक्त रोगी के गले में पहना देने से किसी भी प्रकार नकारात्क उर्जा एवं भूत-प्रेत बाधा दूर हो जाती है.

विष दूर करने के लिए


अपराजिता की जड़ को घिसकर विष वाले स्थान पर लगाने से विष दूर हो जाता है.

प्रसव कष्ट


यदि किसी गर्भवती महिला को प्रसव में कष्ट न हो तो उसके लिए उस स्त्री के कमर में सफेद अपराजिता की जड़ पहना दें.





नकारात्मक उर्जा दूर करने के लिए


यदि आपके घर या ऑफिस में नाकारात्मक उर्जा का वास बना रहता है तो श्वेत अपराजिता की जड़ को शनिवार के दिन एक नीले कपड़े में बाॅधकर दरवाजे पर लटका देने से नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है.

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