पारिजात खूबसूरत और सुगंधित फूल होता है.जिसे हरसिंगार भी कहा जाता है. इसकी मेहक बहुत प्यारी होती हैं.पारिजात को हरसिंगार भी कहते हैं.इसके अन्य भी  नाम हैं .

इसे कूरी, सिहारु, सेओली, प्राजक्ता, शेफालिका, शेफाली, शिउली और अंग्रेजी में ट्री ऑफ सैडनेस, मस्क फ्लॉवर, कोरल जैसमिन, नाईट जैसमिन




उर्दू में इसे गुलजाफरी कहा जाता है .पारिजात को फूलों को मुख्य रूप से हिन्दू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है हालांकि, इसके औषधीय गुणों की वजह से इसका इसका इस्तेमाल विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए भी किया जा सकता है.धर्मिक मान्यताओं से जुड़े इस औषधीय पौधे की हिदू धर्म में पूजा-अर्चना भी की जाती है.


 पारिजात का वानस्पतिक नाम 



निक्टैन्थिस् आर्बोर-ट्रिस्टिस् है और यह ओलिएसी प्रजाति का होता है.



ऐसा माना जाता है



पारिजात के फूल, पत्ते, बीज और छाल का उपयोग मुख्य रूप से किया जा सकता है.ऐसा भी माना जाता है कि पारिजात के पौधे को छूने से ही शारीरिक थकान दूर हो सकती है.


पौराणिक मान्यता के अनुसार चिरयौवन के लिए... 


पारिजात के वृक्ष को स्वर्ग से लाकर धरती पर लगाया गया था.नरकासुर के वध के पश्चात एक बार श्रीकृष्ण स्वर्ग गए और वहां इन्द्र ने उन्हें पारिजात का पुष्प भेंट किया.वह पुष्प श्रीकृष्ण ने देवी रुक्मिणी को दे दिया.देवी सत्यभामा को देवलोक से देवमाता अदिति ने चिरयौवन का आशीर्वाद दिया था. तभी नारदजी आए और सत्यभामा को पारिजात पुष्प के बारे में बताया कि उस पुष्प के प्रभाव से देवी रुक्मिणी भी चिरयौवन हो गई हैं.यह जान सत्यभामा क्रोधित हो गईं और श्रीकृष्ण से पारिजात वृक्ष लेने की जिद्द करने लगी.कहते हैं कि पारिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी जिसे इंद्र ने अपनी वाटिका में रोप दिया था.


 

पारिजात के अन्य लाभ भी जाने


तनाव घटाता 


पारिजात के फूल आपके जीवन से तनाव हटाकर खुशियां ही खुशियां भर सकने की ताकत रखता है.इसकी सुगंध आपके मस्तिष्क को शांत कर देती है.

शांति और समृद्धि लाता 


हरिवंश पुराण में इस वृक्ष और फूलों का विस्तार से वर्णन मिलता है.इन फूलों को खासतौर पर लक्ष्मी पूजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन केवल वही फूलों को इस्तेमाल किया जाता है जो अपने आप पेड़ से टूटकर नीचे गिर जाते हैं.यह फूल जिसके भी घर आंगन में खिलते हैं वहां हमेशा शांति और समृद्धि का निवास होता है.
 

हृदय रोग में लाभदायक 


हृदय रोगों के लिए हरसिंगार का प्रयोग बेहद लाभकारी है.इस के 15 से 20 फूलों या इसके रस का सेवन करना हृदय रोग से बचाने का असरकारक उपाय है, लेकिन यह उपाय किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेकर ही करे.




हरसिंगार की पत्तियों से बनी चाय पीना भी पसंद करते हैं 


जिसे हर्बल टी की श्रेणी में माना जाता है.पारिजात का पौधा लगभग 10 से 15 फीट और कहीं-कहीं 25 से 30 फीट तक बड़ा हो सकता है। इसकी अधिकांश शाखाएं जमीन की तरफ झुकी हो सकती हैं। पारिजात के पौधे में एक साल में सिर्फ एक बार ही फूल खिलते हैं। पारिजात के फूल जून माह में ही खिलते हैं। जो सफेद और पीले रंग के हो सकते हैं।

पारिजात (हरसिंगार) का उपयोग 


पारिजात के पत्तों में एंटी-आर्थ्रिटिक गुण होते हैं.इसके पत्तियों के काढ़े से लीवर की रक्षा करने वाले, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एनाल्जेसिक, एंटीपायरेटिक, एंटी-इंफ्लैमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक, हाइपोटेंसिव जैसे गुण भी पाए जाते हैं.इसकी पत्तियों में एंटी-लीशमैनियल गुण भी होते हैं, जो शरीर में परजीवियों को खत्म करते है. पेट की कीड़ों की समस्या दूर करने में भी मदद करते हैं.



पारिजात (हरसिंगार)मे ये गुण होते है


पारिजात के फूलों से सुगंधित तेल प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें निक्टैन्थीन नामक द्रव्य ग्लूकोसाइड की मात्रा होती है.साथ ही, हरसिंगार के पत्तों और फूलों में एंटी बैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुण भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.


प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए


हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल हर्बल टी के तौर पर किया जा सकता है.जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने का सबसे अच्छा स्त्रोत होता है.इसके पत्तों का इस्तेमाल चाय में करने के साथ ही, इसका रस भी नियमित रूप से पिया जा सकता है.




डेंगू के दौरान हड्डियों के दर्द को कम करने के लिए


डेंगू होने पर शरीर की हड्डियों में काफी दर्द होता है.जिससे काफी कमजोरी भी महसूस होती रहती है.इस शरीर दर्द को दूर करने के लिए हरसिंगार की पत्तियों से बने काढ़े का इस्तेमाल करना लाभकारी हो सकता है.

पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए


अगर आपको या बच्चे के पेट में कीड़े की समस्या है, तो आप अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार हरसिंगार के पत्तों के रस में शहद मिलकर इसका सेवन कर सकते हैं.

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