दोस्तो एक जिंदगी और दो आदमी,उलझी है ये कहानी भाग -1 के आगे की कहानी जानने के लिए आप काफी उत्साहित होंगे. तो चलिए बिना देर करे आगे बढ़ाते है ये कहानी...... 





तो आप इतना तो जान ही चुके की लड़की ने घर सिफ्ट कर लिया था और दुकान भी छोड़ दी थी. अब उन दोनों का मिलना बंद हो गया था. लड़की के पास फोन भी नहीं था जिससे वह बात कर पाती, ऐसे ही समय बितने लगा. लगभग एक साल बाद उस लड़की के पिताजी ने उसे बुटिक मे काम सीखने के लिए भेजा जहा वो काम  भी सिखती और उसे वहा काम करने के  थोड़े पैसे भी मिलते थे.


एक दिन उसे वहा उसकी सहेली मिली जो उसके पुराने घर तरफ रहती थी. उसे देखकर ये बहुत खुश हुई, वो भी इसे अचानक देखकर बहुत खुश हुई. उनकी सारी पुरानी यादे ताजा हो गई. इसने उससे उस लड़के के बारे मे भी पूछा कि वो कैसा है. उसकी सहेली ने बताया की अच्छा है और तेरे ही बारे मे पूछता है.


इसने एक फोन भी ले लिया था. उसने अपनी सहेली से कहा की उससे तू उसका नम्बर मांग कर लाना मे बात करूँगी. उसकी सहेली ने कहा ठीक है में कल लाकर देती हूँ. बस फिर क्या था दोनों मे बाते फिर शुरू हो गई. लड़की जब भी बुटीक जाती बात करती थी दोनों घूमने भी जाने लगे थे. लड़की घर मे कुछ भी बहाना बना कर अक्सर उस लड़के के साथ घूमने जाया करती थी. वह लड़का उसे चॉकलेट और कई तरह के गिफ्ट्स देता था , वह सब अपने घर ले आती और लड़की अपनी माँ से कहती सहेलियों ने दिया है.




अब दोस्तो कहानी मे एक नया मोड आया उस लड़की के घर के बगल मे एक लड़का रहने आया. लड़का देखने मे अच्छा लगता था. एक दिन लड़की अपने काम पर जा रही थी तो लड़के की नज़र उस पर पड़ी, लड़की भी उसे देखने लगी. दोनों मे अट्रेक्सन बढ़ने लगा. अब रोज आते जाते वो दोनों एक दूसरे को बड़े प्यार से देखते जैसे नज़रों ही नज़रों मे मानो बाते कर रहे हो. ऐसे ही उनको सालभर होने आया बस वो एक दूसरे को देखते और मुस्कुराते और कुछ बात नहीं होती दोनों मे, एक दिन  जब वह लड़की अपने काम पर जा रही थी तब  उस पड़ोसी लड़के ने उसका हाथ पकड़ लिया और........... शेष भाग-3 मे पढ़े

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