दोस्तो तो वह गर्भवती थी वो भी जुड़वा बच्चों की माँ बनने वाली थी. सुनंदा को उसके ससुराल मे बहुत परेशान किया जाता था जिससे वह बहुत दुखी थी. लेकिन अब बात सिर्फ उसकी नही उसके 2 बच्चों की भी थी जिनके लिए अब सुनंदा को सोचना था.




शादी के कई साल बाद उसे ये खुशी मिलने वाली थी. लेकिन उसके अय्याश पति को इसकी कोई खुशी नही थी. वह तो बस शराब के नशे मे कोठो मे पड़ा रहता था. घर आता तो बस  सुनंदा को गालिया देता मारता, सुनंदा की ज़िंदगी वहा एक नोकरानी की तरह बन कर रह गई थी.

एक दिन सुनंदा का पति बहुत बीमार पड़ जाता है. शराब ज्यादा पीने से उसके पति के फेफड़े खराब हो गए थे. सुनंदा पर उसके पति द्वारा  इतने अत्याचार करने के बाद भी  सुनंदा उसके पति के अंतिम समय मे भी  उसकी बहुत सेवा करती है लेकिन आखिर उसकी मौत हो जाती है. अब  बहुत ही कम उम्र मे सुनंदा को विधवा का जीवन जीना पड़ रहा था. 

सुनंदा पर दुखो का पहाड़ तो तब टूट पड़ा जब सास ने उस गर्भवती को गालिया देकर घर से धक्के मारकर निकाल दिया. उसकी सास बोली जब मेरा बेटा ही नही रहा तो तु किस हक से मेरे घर रहेगी.





वह रोते हुए बोली मे इस अवस्था मे कहा जाऊ मुझ पर दया करे. लेकिन उसकी क्रूर सास नही मानी और उसे धक्के देकर भगाने लगी. बिचारी सुनंदा कहा जाती मायके मे भी उसके लिए जगह नहीं थी. 

रोते रोते सुनंदा चलती जा रही थी जाने कहा उसे खुद नही पता था. रात हुई तो भिखारियों के साथ मंदिर की सिड़ियों पर ही सो गई. मंदिर के बाजू मे एक  बूढी औरत रहती थी उसकी छोटी सी झोपड़ी थी जहाँ वह चाय नाश्ते की छोटी सी दुकान चला कर अपना गुजर बसर चलाती थी. जब सुबह हुई तो सुनंदा उसकी दुकान  के बाजू मे बैठकर रो रही थी. उस बूढी औरत की नज़र सुनंदा पर गई तो उसने उससे पूछा की क्या हुआ बेटी क्यो रो रही हो?  सुनंदा ने अपनी सारी कहानी उन बूढी माँ को बताई...... फिर आगे क्या हुआ अगली कहानी मे पढ़े.......

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