नमस्कार दोस्तों ये कहानी है एक सीधी और सुंदर सी लड़की की आपको इस लड़की की कहानी में काफी उतार-और चढ़ाव नज़र आएंगे. आशा है आपको इस लडकी की कहानी पढ़ते हुए भी बहुत मज़ा आएगा

 तो चलिए कहानी को  आगे बढ़ाते है. कहानी में जो लड़की है उसका नाम सुनैना है. सुनैना एक गरीब परिवार से है .सुनैना के पिता एक गरीब किसान थे और सुनैना की माँ एक कुशल गृहणी है.




जब सुनैना मात्र 12 वर्ष की थी तब उसके पिता इस दुनियां को छोड़ कर चले गए.सुनैना की एक बड़ी बहन और दो छोटे भाई भी थे. सुनैना की माँ ने मेहनत मजदूरी कर इन चारो बच्चों को पाला  उनकी पढ़ाई लिखाई करवाई.



जब सुनैना कि दीदी 18 वर्ष की हुई तब उसने प्रेम विवाह कर अपना घर छोड़ किसी अन्य जगह जा कर रहने लगी.सुनैना उस समय 17 वर्ष की थी. उस समय सुनैना के भाई काफी छोटे थे ,सुनैना की माँ भी बीमार रहने लगी थी. जिससे सुनैना कि माँ की चिंता और बढने लगी.सुनैना की माँ ने किसी से कर्जा ले रखा था जो वह अपनी बीमारी कि वजह से चुका नही पा रही थी .जब यह बात सुनैना को पता चली तो  ऐसे में सुनैना ने  नौकरी करने की सोची ,उस वक्त वह मात्र 10 वी पास थी.

सुनैना अब नौकरी की तलाश    में  इधर-उधर घुमने लगी लेकिन उसके लाख कोशिशो के बावजूद उसे कही अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही थी.उसने अपने सारे दोस्तों और जान पहचान वालो को बता रखा था कि जहा भी कोई नौकरी मिले उसे तुरंत खबर करे.

दोस्त भी उसकी मजबूरियों से वाकिफ थे.एक दिन उसके साथ पढने वाले एक दोस्त  ने किसी काम के बारे में बताया जो वह कर सकती थी.उसे एक खाली घर की देख-रेख करने का काम मिला था,जिसके बदले उसे 15 हजार मिलने वाले थे.         

सुनैना को जब नौकरी मिली तो तब उसकी खुशी का ठिकाना न था. वह काम पर जाने लगी उस घर के मालिक कई कई सालो मे आते थे वो भी कुछ ही दिन के लिए. सुनैना की वफादारी से खुश हो कर मकान के मालिक ने उसको और उसके परिवार को रहने के लिए कमरे दे दिए थे. सुनैना अब अपने गांव की झोपड़ी छोड़ वही रहने लगी थी. 

ऐसे ही दिन बीतने लगे सुनैना की तंख्वा भी बढ़ा दी थी उसके मालिक ने अब उसे 30 हजार मिलने लगे थे. सुनैना के भाई भी जवान हो गए अच्छे कॉलज में पढ़ रहे थे. सुनैना ने धीरे- धीरे पैसे जोड़कर एक खुदका घर भी बना लिया था. एक दिन उसके भाई ने कहा की मुझे एक लड़की बहुत पसंद है मे शादी करना चाहता हूँ. 

तब सुनैना ने अपने भाई की शादी करवा दी और लाखों पैसे खर्च किये. एक भाई की शादी करवा दी दूसरे भाई की सरकारी नौकरी के पीछे लाखों लगवा दिया. इसके बाद भाई नौकरी करने लगे,  दोनों भाई अब शादीशुदा हो गए तो सुनैना ने सोचा अब तो ये कमा रहे मे अब ये नौकरी छोड़ देती हूँ. 

कुछ दिन तो सब ठीक रहा लेकिन वो कहते है न "सबकुछ ठीक बहुत दिन तक नही होता" ऐसा ही कुछ सुनैना के साथ भी हुआ. सुनैना को उसकी भाभिया परेशान करने लगी सुनैना की माँ को भी दुःख देती. उनके ऐसे व्यवहार से सुनैना और उसकी माँ बेहद दुःखी रहते थे. 

एक दिन सुनैना ने अपने भाईयो से कहा की तुम्हारी पत्नियां माँ को और मुझे उल्टा सुल्टा बोलती है लड़ती है कुछ नही सुनती तुम लोग कुछ कहते क्यो नही हो? तब सुनैना का भाई जबाब देता है कि दीदी ताली एक तरफ से तो नही बजती तुम्हारा और माँ का भी कुछ दोस होगा. ये सुनते ही सुनैना सुन रह जाती है वह कुछ और बोल ही नही पाती... 


सुनैना ने एक जमीन अलग से ले रखी थी जिसकी कीमत आसमान छू रही थी. सुनैना ने उसे बेचकर एक छोटा सा घर ले लिया और बाकी पैसे अपने बैंक मे जमा करवा लिए. सुनैना अपनी माँ को लेकर अपने नए घर चली गई वहा दोनों माँ बेटी ने कपड़ो की दुकान भी खोल ली उनका कारोबार बहुत अच्छा चलने लगा था. 


इधर सुनैना के भाई की कंपनी बन्द हो गई और वो बेरोजगार हो गया छोटे भाई की तनख्वा मे सब गुजारा कर रहे थे. छोटे भाई की कम तनख्वा मे घर नही चल पाता था तो कर्जे करने पड़ते थे. साहूकार से मोटे ब्याज में पैसे लाते और घर चलाते. ऐसे करते करते कर्जा इतना बढ़ गया कि घर भी बीक गया और वो रोड पर आ गए. 

अब वो किराए की एक छोटी सी झोपड़ी में रहने लगे थे. उधर सुनैना की दुकान बहुत बड़ी हो चुकी थी,उसके दुकान मे 4,5 नौकर काम करते थे. 

दुकान में ही आने वाले एक ग्राहक को सुनैना से प्यार हो गया और वो सुनैना की माँ से उसका हाथ मागने चला गया. वह आदमी पुलिस मे si पद में था. उसकी माँ इतना अच्छा रिश्ता पा कर बेहद खुश थी. सुनैना की शादी हो जाती है और वह उसके साथ बेहद खुश रहती है. 


एक दिन सुनैना और उसके पति एक चाय की छोटी सी टपरी मे चाय पीने जाते है तब वहा उसका भाई चाय बनाते और भाभी बर्तन माजते नजर आती है. सुनैना को देखते ही दोनों पैर पर गिर कर गिड़गिड़ाने लगते है. सुनैना भी रोने लगती है और उनसे पूछती है ये कैसे हुआ वह अपना सारा हाल बतलाते है. सुनैना अपने दोनों भाई और भाभियो को अपने घर ले जाती है. 

लेकिन मां उनको घर में आने से मना करवा देती है लेकिन सुनैना और उसका पति उनको समझाते है. सुनैना के भाई भी पैरो मे गिर कर उनसे क्षमा मानते है. वह उनको माफ कर देती है. 

सुनैना अपनी दुकान भाई को चलाने दे देती है और कहती है माँ की अच्छे से सेवा करना मै अब अपने पति के घर जा रही हुँ. फिर सब हँसी खुशी रहने लगते है.......... तो दोस्तो कहानी कैसी लगी कॉमेंट में बताना आजके लिए इतना ही फिर मिलते है अगली कहानी में 🙏

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